ना किताब ना कलम फिर भी पढ़ाई नम्बर वन, जानीं कईसे

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देश में जहवां बच्चन के पढ़ाई के बोझ उनकर बैग से देखल जा सकेला….. ओहिजां एक गांव अइसन भी बा जउन बैग लेस यानी बिना बैग के पढ़ाई कराके एगो  मिसाल पेश कर रहल बा….

बैग लैस पढ़ाई से एह स्कूल में पढ़े वाला बच्चन के संख्या में बढोत्तरी हो रहल बा। इहां के शिक्षक लोग बच्चन के पढ़ावे खातीर एगो  नायाब तरीका निकलले बाड़न।  शिक्षक लोग लकड़ी के चौकोर गुटखन से खेल-खेल में ही पढ़ाई करावे के नया तरीका इजात कइले बाड़न।

आज से करीब दु साल पहिले कोगवार स्कूल के दुई शिक्षक लकड़ी के चौकोर अउर गोल गुटखा से सप्ताह के दिन के नाम से लेके गिनती,हिंदी,अंग्रेजी सहित सामान्य ज्ञान के पढ़ाई करावे के शुरुआत कइले रहन।  इहवां लकड़ी के चौकोर हिस्सा में अंक, हिंदी के वर्णमाला ,मात्रा,अंग्रेजी के अल्फाबेट्स के लिखके ओकरा  से खेल खेल के माध्यम से पढ़ाई करावल जाला।

आजकल इ नया तरीका से पहिला, दूसरा अउर तीसरा कक्षा के लईकन के पढ़ावल जा रहल बा अउर लईका लोग  भी खेल- खेल में मन लगाके पढ़ाई करल। जहवां इ आधुनिक युग में बच्चन के बस्ता के बोझ कम होखे के नाम नइखे लेवत ह, उहवां इ स्कूल  बैग लैस शिक्षा के माध्यम से देश के दूसरे स्कूलन के सामने  एगो मिसाल पेश कर रहल बा।

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