प्रसिद्ध शिल्पकार फणिभूषण नाहीं रहलन

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बिहार के प्रसिद्ध शिल्पकार फणिभूषण विश्वास के निधन मंगलवार देर रात सीतामढ़ी स्थित आवास पर हो गईल। उहाँ के निधन से जिला में शोक के लहर दौड़ गईल। निधन के खबर सुनके केहू के विश्वास नाहीं भईल अउरी उहाँ के आवास पर लोग के तांता लाग गइल। बुधवार के उहाँ के अंतिम संस्कार लखनदेई नदी के किनारे कईल गईल। फणिभूषण जी मूल रुप से बांग्लादेश के जोशर क्रोड़ग्राम के रहे वाला रहीं। उहाँ के शिक्षा-दीक्षा सीतामढ़ी आउर दरभंगा में भईल। फणिभूषण जी शहर के थाना रोड स्थित शिल्पकुटीर में रहत रहीं। उहाँ के अपना पीछे भरापूरा परिवार छोड़ गईनीं।

फणिभूषण में उत्कृष्ट काम कईला के तरीका रहल

उहाँ के कुछ दिन से बीमार चलत रहनीं लेकिन उम्र के एह पड़ाव में भी गजब के जोश अउरी  ऊर्जा रहल। जानकी उद्भव के रचनाकार फणीभूषण के जन्म 27 नंवबर 1927 के भईल रहल। उहाँ के बचपन से शिल्पकारिता आउर चित्रकारिता में रूचि रहल। इहे कारण ह कि फणिभूषण जी शिल्पकारिता आउर चित्रकारिता के क्षेत्र में जिलास्तर से राष्ट्रीय स्तर तक पुरस्कृत भईनीं। वर्ष 1965 आउर 1973 में उहाँ के  एसआरके गोयनका कॉलेज में आयोजित चित्रकला प्रदर्शनी में निर्णायक रूप में चयनित कईल गईल। साल 1967 में देश के श्रेष्ठ शिल्पी उपेन्द्र महारथी उहाँ के कला सम्मान से नवजनीं।  फणिभूषण जी सामवेद फिल्म एण्ड टेलीविजन में प्रतिनिधि के रूप में चुनल गईनीं अउरी 1988 में जिला फोटोग्राफर्स एसोसिएशन द्वारा सम्मानित कईल गइनीं।

जीवंत झांकी के कारण लोग के दिल में जिंदा रहेम

फणिभूषण जी के जानकी उदभव के झांकी से संबंधित मूर्ति, प्रतिमूर्ति देश के कोना-कोना में सदी तक याद रही। उहाँ के अपना जीवंत झांकी के वजह से लोग के दिल में जिंदा रहेम । शिल्पकारी के जादू से बेजान पत्थर में जान डालके हरदिल अजीज फणि दा के भुलावल आसान नाहीं होई।

अब कलाकारन के कद्र नाहीं होला

फणी दा के लेके प्रशासनिक आउर जनप्रतिनिधि लोग के उदासीनता लोग के खलेला। फणिभूषण जी के प्रशंसक लोग के कहनाम बा कि कला आउर कलाकार के कद्र होखे के चाहीं। कला के बढ़ावा देवे के बात बयानबाजी से ढ़ेर नाहीं होला। कवनो राजनीतिक दल के एगो नेता के  मौत होला, त पूरा सिस्टम फूल-माला लेके पहुंच जाला, लेकिन फणि दा जईसन कलाकार, जवन सदी में एक बार जन्म लेला , उहाँ के पार्थिव शरीर पर शासन-प्रशासन आउर जनप्रतिनिधि के ओर से श्रद्धा के एगो पुष्प नाही अर्पित कईल गईल। खास करके तब जब सीएम नीतीश कुमार खुद उहाँ के शिल्पकारी के कायल रहलन।

फणि दा के एगो बुलावा पर सीएम नीतीश कुमार सीतामढ़ी पहुंच के  जानकी उदभव झांकी के रेलवे स्टेशन परिसर में उदघाटन कईले रहलन। मंगलवार के रात शहर के रिंग बांध लक्ष्मणानगर स्थित शिल्प सदन में शिल्पकार फणिभूषण विश्वास अंतिम सांस लेहनीं। जानकी उछ्वव झांकी, घटधारिणी, मोनालिसा समेत सैकड़ों प्रतिमा के सृजन करे वाला फणिभूषण विश्वास अपना पीछे पुत्री पल्लवी विश्वास आउर तीन पुत्र दीपक, तपन आउर रमण समेत भरा-पुरा परिवार छोड़ गईलन।

बाबू जी के एके शब्द – फणि बिकाऊ नाही बाने

पल्लवी के पिताजी पल्लवी से बेहद प्रेम करत रहनीं। देश स्तर के नृत्यांगना आउर संगीतकार पल्लवी विश्वास के जीवन में ऊ दौर भी आईल जब पल्लवी, पिता के जानकी उदभव के झांकी नृत्य नाटिका के रूप में प्रस्तूत कईली। राष्ट्रपति आउर प्रधान मंत्री के कार्यक्रम में मंच संचालन करे के गौरव प्राप्त कर चुकल पल्लवी पुरान याद के सांझा करत कहली कि बाबू जी के एके शब्द रहल –‘फणि बिकाउ नइखन।‘ पूरा  उमर उ एह शब्द के प्रासंगिकता के बरकरार रखनीं अउर कबो आपन कृति नाहीं बेचनीं।

पद्मविभूषण के उठल मांग

फणि भूषण विश्वास जईसन कलाकार सदी बाद धरती पर जन्म लेवेनीं। अब मरणोपरांत उहाँ के पद्मविभूषण सम्मान से सम्मानित करे के मांग उठता। जिला के साहित्यकार, शिक्षाविद आउर कलाकार सरकार से फणि दा के प्रतिमा सीतामढ़ी में लगावे, उहाँ के नाम पर शोध-संस्थान के  स्थापना करावे आउर भारत सरकार से उहाँ के पद्मविभूषण सम्मान से सम्मानित करेके मांग करता। पल्लवी विश्वास कहली कि उनकर पिता एकर हकदार बानी।

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